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प्रश्नोत्तर P21-0172 · भाग 21

गुरु जी, आप कहते हैं परिवार नहीं समझते; हमारे परिवार में, खासकर महिलाओं के लिए, अभी भी परिस्थिति ऐसी है कि सब छोड़ के जाना वो नहीं मानते — पुरुषों के लिए अलग है। आपका परिवार नहीं है, हमारा परिवार है ना — उसको छोड़ के कैसे चलना है?

आप परिवार ना छोड़िए। परिवार में रहते हुए ईमानदारी और शुभ कर्म अपना लीजिए; बाहर जाने को नहीं मानते तो कोई बात नहीं, जहां हो वहीं करो। कभी हो सकता है कि आप ऐसी स्थिति में आ जाओ कि परिवार ही आपको छोड़ दे — मैं भी तो कभी परिवार में था। जब आप उनके काम की नहीं रहोगी तो घर में रह के भी लोग छोड़ देंगे। कोई बात नहीं — ईमानदारी-सत्कर्म अपना लो, सत्संग सुनते रहो, कैसे आपका कल्याण हो उसके लिए काम करते रहो। शरीर लेके कहीं मत जाइए; जहां से हो वहां शुरुआत करिए — आप शुरुआत करेंगी तो अंत तक खुद चली जाएंगी। परिवार छोड़ने की जरूरत नहीं है।

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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06