आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P21-0179 · भाग 21

गुरु जी, मैं कितने सालों से आध्यात्म के मार्ग में चल रही हूं, लेकिन जितनी रुचि होनी चाहिए वो नहीं है, इंटरेस्ट भी जा रहा है — ऐसा क्यों, मैं अपनी रुचि और स्पीड कैसे बढ़ाऊं?

पहले मैं आपसे पूछना चाहता हूं — आप आध्यात्म में चलने की तैयारी कर रहे हो कि आध्यात्म में चल रहे हो? क्या आप यहां खड़े होके बोल सकते हो कि आप पूर्णतः ईमानदार हो — हां या ना? तो आध्यात्म की शुरुआत ही आपके जीवन में नहीं है; अभी आप प्लानिंग कर रहे हो कि मैं आध्यात्म के लायक कैसे हो जाऊं। जब चले ही नहीं हो तो भटकने का सवाल ही नहीं। जब आप ईमानदार ही नहीं हो तो चले कहां — बेईमानी की तरफ हो तो बंधन बांध रहे हो; छुड़ाने का तो सवाल ही नहीं उठता, आप तो नए-नए बंधन बांध रहे हो। नाम के आध्यात्मिक मत बनो, काम के आध्यात्मिक बनो — काम में उद्धार है; जितना बोलते हो उसमें जीना पड़े। जैसे कोई व्यक्ति रोल लेता है तो उसके लिए तैयारी करता है और एक दिन रोल में उतरता है — अभी आप आध्यात्म के रोल की तैयारी कर रही हो, रोल में उतरी ही नहीं, तो गड़बड़ी का सवाल ही नहीं; अभी आध्यात्म के लायक बनो। जब आप ये कह दोगे कि मैंने पूरी तरह ईमानदारी अपना ली, मेरा रोम-रोम ईमानदार है, उसी क्षण से आपके जीवन में आध्यात्म की शुरुआत हो जाएगी, और इसकी फीलिंग आपको होगी। तो जितनी जल्दी हो सके — मैं तो कहूंगा अभी — पूरी तरह ईमानदारी का संकल्प ले लीजिए।

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