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प्रश्नोत्तर P21-0182 · भाग 21

गुरु जी, आप जो आठ शब्द बोलते हैं — छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — इन्हें उदाहरण से समझाइए।

छल का मतलब — किसी ने मुझ पर भरोसा किया और समय आने पे मैंने उसके साथ छल कर दिया, उसके विपरीत खड़ा हो गया। कपट — किसी ने भरोसा किया कि आप बंटवारा सही करोगे, लेकिन आपने उसे कम दे दिया और खुद ज्यादा ले लिया, या जिससे आपका मोह था उसे ज्यादा दे दिया — भेदभाव कर दिया; वो कम लेके चला गया लेकिन आप गिर गए, क्योंकि उसने आप पर भरोसा किया था। चोरी — सामने वाले को पता नहीं, मैंने उसकी वस्तु चुरा ली। बेईमानी — सामने वाले को पता है, लेकिन मैंने अपनी ताकत — वैभव का बल, शरीर का बल, समझ का बल — का उपयोग करके उससे छीन लिया; दिन-दहाड़े खुला, सबको पता है, कोई सामने खड़ा नहीं हुआ — जैसे एक मजबूत किसान कमजोर किसान की मेड़ धीरे-धीरे काट रहा है और वो बोल नहीं पा रहा। चापलूसी — जैसा वो नहीं है वैसा आप बताने लगे, उससे कुछ लेने के लिए; सामने वाहवाही, पीछे गाली; जैसे गरीब शराब पीकर आए तो बेवड़ा, और अमीर आ जाए तो उसे दरवाजे पे पिलाते हैं और जाते ही गालियां। चापलूसी आपको हमेशा गिराती है — जैसा सामने वाला है वैसा बोलो; नहीं समझा तो पहले पांचों इंद्रियों से उसे समझो। जैसे आपने यहां मेरा परिचय दिया — अगर जितना आपको प्रत्यक्ष मालूम था उतना बोला तो आप उठ गए, और आकर्षित करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बोला तो आप गिर गए; परिणाम तो मेरे कर्म से आएगा ही, ये लोग उठ जाएंगे पर आप गिर गए। किसी की झूठी बुराई करके लोगों को उससे दूर किया तो उसका पाप, और झूठी बढ़ाई करके लोगों का समय बर्बाद किया तो उसका भी। इसलिए जितना पता है उतना ही बोलो। मक्कारी — किसी ने भरोसा किया और आपने उसे जहर दे दिया, चोरी से मार दिया; जैसे बच्चे अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपने मां-बाप को मार देते हैं — विश्वासघात। धूर्तता — मौके पे धोखा: पहले आश्वासन दिया "कर देंगे," उसने भरोसा रखा, आपकी जरूरत पड़ने पर उसने आपकी मदद भी की, आप लायक भी हो — लेकिन जैसे ही उसे जरूरत पड़ी, आपने कहा मुझसे नहीं होगा। पाखंड — भेष बदलना; जैसा मैं नहीं हूं वैसा लोगों को बताना, ठगने के लिए; पुलिस नहीं हूं फिर भी पुलिस बताना — अपनों की कुटिया में एक सब्जी वाला आया था, अपने को पुलिस वाला बताया; जैसे ही पता चला, अंदर से उसके लिए श्राप निकला।

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