प्रश्नोत्तर P21-0183 · भाग 21
गुरु जी, राग, द्वेष, मोह, आसक्ति — इनके बारे में भी उदाहरण के साथ बताइए।
राग का मतलब होता है लगाव। जब मैं उस योग्य नहीं हूं और सामने वाले ने मुझे दे दिया, तो उससे राग हो जाएगा — आपकी क्षमता नहीं है और उसने आपकी मदद कर दी, तो आप उसके एहसानों तले दब गए; जब भी वो दिखेगा आप झुक जाओगे, कभी वो गलत भी करेगा तो विरोध करना चाहोगे पर कर नहीं पाओगे — तो उसके प्रति द्वेष भी हो जाएगा। या उसने दे दिया, और समय आने पर मांगा, आपके पास लौटाने की योग्यता नहीं, तो वो आपको समाज में जलील करने लगा — उसी व्यक्ति के प्रति द्वेष; पहले दोस्ती अच्छी थी, बाद में बिगड़ गई। फैमिली में भी देखो — कोई आपको कुछ दे रहा है, बढ़ाई कर रहा है, सेवा कर रहा है तो क्यों, किस भाव से, और क्या आप उस योग्य हो? घर में सबसे एक जैसा भाव नहीं रहता — जिससे जितना मिलता है उसे उतना देते हो। अगर मेरा बच्चा, पति या पत्नी मेरी बढ़ाई कर रहे हैं और मैं उस लायक हूं, तो राग-द्वेष दोनों नहीं होंगे; लायक नहीं हूं तो राग हो जाएगा, और जब उसके विरोध में खड़ी होगी तो वो झटकेगा — पहले राग, बाद में द्वेष। राग से मोह, और आसक्ति तब होती है जब उससे कुछ मिल रहा था, फिर मैं दूर गया या वो दूर गया, और जहां गया वहां नहीं मिल रहा — तब उसकी याद सताएगी; याद सताए उसे आसक्ति कहते हैं। राग से शुरुआत — ओपनिंग बैट्समैन; और राग तभी होता है जब योग्यता से ज्यादा कोई आपको देता है — चाहे बढ़ाई हो, कुछ भी — आप लो ही मत।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29