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प्रश्नोत्तर P21-0184 · भाग 21

गुरु जी, ईमानदारी के साथ इन शब्दों को जोड़ें तो — राग, मोह और आसक्ति के बीच ईमानदारी और बेईमानी क्या है?

बेईमानी ये है कि जब वो आपको दे रहा है और आप योग्य नहीं हो, तो ले क्यों रहे हो? पूछ लो — "मैं तो उस लायक हूं ही नहीं, आप क्यों दे रहे हो?" जब भी कोई वस्तु या सम्मान मिले तो देखो आप उस लायक हो या नहीं, सामने वाला धोखे में तो नहीं दे रहा — क्योंकि आज धोखे में दे रहा है तो कल खुलेगा तो जिस तरीके से सम्मान किया उसी तरीके से जलील भी करेगा। जैसे चालू का टिकट लेके रिजर्वेशन में बैठ जाओ — हो सकता है टीटी अच्छा हो, बैठा दे, लेकिन आगे कोई और बेइज्जत करने आएगा; अपनी जगह पे बैठोगे तो टीटी की भी औकात नहीं कि बेइज्जत कर दे, और राग-द्वेष नहीं होगा। धोखे से सम्मान मिल रहा है तो बेइज्जत होने के लिए भी तैयार रहो। इसलिए लेने से पहले समझ लो कि मेरी योग्यता है या नहीं — रिजर्वेशन में जाना है तो और पैसे कमाओ, रिजर्वेशन का टिकट लेके जाओ।

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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29