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प्रश्नोत्तर P21-0185 · भाग 21

गुरु जी, और इच्छा, अपेक्षा और मेरा — इनका मतलब क्या है?

इच्छा का मतलब — जितनी आपकी सामर्थ्य नहीं है उससे ज्यादा चाहो, दूसरों का देख के। आपकी सामर्थ्य है कि इतने में जी सकते हो, पर आपने इच्छा बना ली कि गाड़ी लेनी है, जबकि गाड़ी की औकात नहीं — तो ये इच्छा दुख देगी; ले लोगे तो भी — तेल नहीं भरा पाओगे, मेंटेनेंस नहीं कर पाओगे; लेने के बाद संभालने की योग्यता चाहिए। और लेने के लिए बेईमानी करनी पड़ेगी — किसी को निमित्त बनाना पड़ेगा, उधार-कर्जा लेना पड़ेगा; वो मांगने भी आएगा, पर लौटाने की सामर्थ्य नहीं। तो जितनी सामर्थ्य है उतना काम करो — तब आप जरूरत में जी रहे हो, ये बंधन नहीं। अपेक्षा का मतलब — आपने किसी के लिए कुछ किया, दुनिया को दिखाने के लिए कह दिया कि बस ऐसे ही हेल्प कर रहे हैं, पर अंदर उम्मीद बांध रखी कि समय आने पे ये मेरे लिए करेगा; उसे पता ही नहीं था, उसने कहा मैं नहीं करूंगा — तब आपको दुख होगा, उससे घृणा हो जाएगी, लेकिन दोषी आप हो, वो नहीं। तो पहले ही बात कर लो कि फ्री में कर रहे हो या इसके बदले ये लोगे — ये ईमानदारी है। इच्छा और अपेक्षा ही दुख का कारण हैं। और मेरा — मेरा वैभव, मेरे शरीर की ताकत, मेरा परिवार, मेरा समाज, मेरे लोग; जब आप उसका दुरुपयोग करते हो किसी को गिराने, तकलीफ देने के लिए, तो मेरा दुख का कारण बन जाता है। मेरा का सदुपयोग — आपके पास समाज, शरीर या धन की ताकत है तो जरूरतमंद लोगों की सहायता करो।

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