प्रश्नोत्तर P21-0189 · भाग 21
गुरु जी, एक विद्यार्थी इंजीनियरिंग या डॉक्टरी में नहीं जाना चाहता, साधारण BA करना चाहता है; लेकिन घर में सब इंजीनियर हैं, दबाव है — घर वाले इज्जत नहीं देंगे, कंपेयर करेंगे — तो वो दबाव में झूठ बोल देता है कि मैं भी करूंगा। उसे क्या करना चाहिए?
अगर वो नहीं चाहता, कुछ और चाहता है, तो वो करके भी दुखी मिलेगा — सफलता समाज को दिखेगी, लेकिन वो असफल हो चुका है; वो हमेशा घुटन में, निराशा में जिएगा। जैसे स्कूल भी मौका देती है — जब आप लायक नहीं रहते तब स्कूल विषय देती है, लेकिन एक समय आता है जब पूछा जाता है कि आप क्या बनना चाहते हो, आपकी क्वालिटी क्या है; उस समय फॉर्म उसे ही भरना पड़ता है, पिता से नहीं भरवाते — फैसला उसे ही लेना पड़ेगा। विद्यार्थी को देखना है कि मैं क्या कर सकता हूं, मैं क्या करना चाहता हूं; परिवार के दबाव में किया तो करके भी असफल हो गया। बस इतना विशेष ध्यान रखना है कि मेरे कर्म से किसी को तकलीफ ना हो — और अगर हो, तो ये देखना है कि उसका जिम्मेदार मैं नहीं हूं। क्योंकि तीन प्रवृत्तियां हैं — देव, राक्षस और सात्विक; जब भी आपके द्वारा कुछ कर्म होगा, विरोध भी होगा और लोग स्वीकार भी करेंगे।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29