प्रश्नोत्तर P21-0191 · भाग 21
गुरु जी, आदि शंकराचार्य जी ने अपने श्लोकों में बहुत कुछ कहा है — अगर वो श्लोक समझ लें तो क्या "मैं कौन हूं" का जवाब मिल जाएगा?
अगर उससे जवाब मिल गया होता तो आप यहां नहीं होते — उससे जवाब आपको नहीं मिल पाया है। इसलिए इस पृथ्वी पर जितने भी गुरु हुए, चाहे आदि गुरु शंकराचार्य हों, उन्होंने कहा जीवंत गुरु ढूंढना। क्योंकि देश-काल-स्थिति-परिस्थिति में फंसने का तरीका बदलता रहता है — बेईमानी का तरीका बदलेगा, रहन-सहन बदलेगा। जैसे भारत घूमने के लिए 30 साल पहले का नक्शा ले लो — सारे रास्ते बदल गए, आपके गांव का नक्शा भी बदल गया। जीवंत गुरु का मतलब — जो पहुंच गया हो, अपने स्व में स्थिर हो गया हो। राम, कृष्ण भी गुरु की शरण में गए। श्लोक सुनने से, व्याकरण या शास्त्र पढ़ने से ज्ञान नहीं होगा — भोजन बनाने की किताब पढ़ लो तो भोजन बनाना थोड़ी आ जाएगा। विद्यालय कितना भी खूबसूरत हो, अच्छा शिक्षक शरीर छोड़ गया तो उसकी फोटो लगाकर बच्चों को नहीं पढ़ाया जा सकता; गाइड से पढ़ाओ तो बच्चों का मानसिक ग्रोथ नहीं होगा — पढ़ाने वाला शिक्षक चाहिए, जो उत्तर के साथ तरीका देता है, और तरीका कभी किताबों में नहीं लिखा जा सकता। फंसने का तरीका बदला है तो निकालने का भी तरीका बदलेगा — इसलिए जीवंत गुरु चाहिए।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29