आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P21-0192 · भाग 21

गुरु जी, हर चीज नई बन जाती है, हर क्षण बदलाव आता है — तो क्या गुरु की उंगली पकड़ के चलना कभी छोड़ ही नहीं पाएंगे?

गुरु क्या है, पहले ये समझो। गुरु कोई उंगली नहीं है, गुरु कोई शरीर नहीं है — गुरु एक पद है, गुरु ज्ञान का प्रतीक है। उसके द्वारा ज्ञान मिल रहा है, उस ज्ञान के द्वारा मुझे चलना है; वो ज्ञान लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग बनेगा। ज्ञान लेकर चलना है, उंगली नहीं पकड़नी। जैसे रास्ता भूले तो किसी से पूछते हो — वो कुछ किलोमीटर तक का बताएगा; आगे फंसोगे तो वहां किसी से पूछोगे — वो सब जीवंत गुरु हैं। पहला आदमी पूरा फाइनल रास्ता भी बता दे तो आपको याद नहीं रहेगा, और हो सकता है रास्ता बंद हो गया, पुल टूट गया, नया पुल बन गया। इसलिए जहां फंसो वहां पूछो, जब तक लक्ष्य तक ना पहुंच जाओ — लेकिन आपको पुकारना पड़ेगा कि मैं रास्ता भटक गया हूं। जिससे रास्ता पूछता हूं उसको मैं पकड़ता नहीं, उसका पता लेता हूं और आगे निकल जाता हूं; संशय हो तो आगे किसी और से पूछ लेता हूं। ये प्रकृति कल्पवृक्ष है — चौराहे पे कहो मैं बहुत प्यासा हूं, कोई पानी पिलाने आ जाएगा; भूखा हूं, कोई आ जाएगा; पहले भाव बनता है, फिर कर्म, फिर परिणाम। इसीलिए शास्त्रों में कहा कि किसी भी शास्त्र का अध्ययन योग्य गुरु की शरण में करना, अकेले मत करना।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29