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प्रश्नोत्तर P21-0194 · भाग 21

गुरु जी, ऐसा सुना है कि शिष्य गुरु को ढूंढता है — या गुरु शिष्य को ढूंढता है?

गुरु शिष्य को ढूंढता है। वो शब्द बोलता है, और जिसकी जिज्ञासा रहती है वो आ जाता है। जैसे मैं यहां आया हूं तो पहले मैंने पुकारा है, तो प्रोफेसर जी पहुंचीं; अगर मैं चुप रहता तो वो वहां तक नहीं पहुंच पातीं — मेरी स्थिति तो ऐसी हो गई थी कि लोग मुझे पागल कहते थे; बोलता नहीं तो लोग समझते कोई पागल पड़ा है। शिष्य कौन? जिज्ञासु — जिसकी जिज्ञासा है मुक्ति-मोक्ष के लिए, दुखों से मुक्त होने के लिए, उस परम आनंद में होने के लिए; गुरु पुकारता है तो वो वहां पहुंच जाता है। लेने वाले को पहले पता है कि ये देगा, तभी तो मांगता है — देने वाला पहले से बैठा है, तभी लेने वाला पहुंच रहा है। और गुरु ज्ञान का प्रतीक है — हम शरीर को, आवरण को पकड़ लेते हैं; उद्धार ज्ञान से होगा, शरीर से नहीं। गुरु की उंगली नहीं पकड़नी, गुरु जहां इशारा कर रहा है वहां जाना — नहीं तो वो उंगली आखिर में पंच तत्व में विलीन हो जाएगी और मैं उसके लिए तड़पने लगूंगा, और जहां उसने दिखाया वहां गया ही नहीं। आप उसके पास ज्ञान के लिए गए हो, तो ज्ञान ही ले आना, शरीर में मत फंस जाना।

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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29