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प्रश्नोत्तर P21-0198 · भाग 21

गुरु जी, मेरे इस शरीर से जो अच्छे-बुरे कर्म हो गए हैं, इन कर्मों का आत्मा के साथ कोई संबंध है? आत्मा तो ना मरने वाली है, परमात्मा का अंश है — तो क्या ये कर्म अगले जन्म में आत्मा के साथ जाते हैं? और चलाने वाला तो परमात्मा ही है ना?

अगर आप बोल रहे हो "मैं", तो आपके पीछे आत्मा ही तो है — मूल; आप अभी कुछ और बन गए हो, लेकिन उसके पीछे आत्मा ही है, वही तो आप हो। आत्मा शुद्ध थी — अशुद्धि मैंने धारण की। शरीर कोई कर्म नहीं करता; शरीर को साधन बना के आपने कर्म किया। ये शरीर, ये पांच तत्व भी तो उसी परम सत्ता से हैं — क्या इसका परमात्मा कोई दूसरा है? मैं परमात्मा का अंश नहीं, मैं उस परमात्मा से हूं। लेकिन चलाने वाला मैं हूं, परमात्मा नहीं। आपने इस दुनिया में एक नई दुनिया बनाई, और उसे बनाने के लिए बेईमानी की, अपने कर्मों से परेशान हुए — वो आपने किया, इसमें परमात्मा का कोई रोल ही नहीं। इस समाज में इतनी चोरी, लूट, बलात्कार हो रहा है — क्या परमात्मा करवा रहा है? छोटी बच्चियों के साथ कोई दुष्कर्म कर रहा है तो उस व्यक्ति के शरीर में परमात्मा नहीं, वो खुद है, और अपनी कामना-वासना पूरी करने के लिए कर रहा है — उसका पूरा रोल है। मेरे जीवन में मेरा रोल है; कर्ता मैं हूं, इसलिए तो मैं दुखी हूं। परमात्मा चलाता तो दुनिया इतनी गंदी नहीं होती। ये दुनिया जरूरत में चल रही है, और उस जरूरत में मैं बेईमानी कर रहा हूं, और उस बेईमानी का परिणाम आज मेरे सामने खड़ा है। सुनी-सुनाई नहीं, प्रत्यक्ष में बात करना सीखिए।

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