प्रश्नोत्तर P22-0034 · भाग 22
गुरु जी, आपका मौन सहज मौन है या प्रयास-युक्त मौन?
जब आपको कुछ नहीं चाहिए तो आप मौन हो जाते हो, और जब आपको कुछ चाहिए तो आप बोलने लगते हो — बस "चाहिए" का खेल है। जब आपको चाहिए तो आप बोल रहे हो, मौन नहीं हो; और जब कुछ नहीं चाहिए तो आप बोल के भी मौन हो। अगर आपको कुछ चाहिए तो चुप होके भी — मुंह से नहीं तो मानसिक बोल बोल रहे हो, और भी इंद्रियों का उपयोग कर रहे हो।
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