प्रश्नोत्तर P22-0045 · भाग 22
गुरु जी, मेरी बेटी ने भगवा कपड़े पहन लिए; मैं उसे समझाकर घर ले आई, पर उसके अंदर कथा-वाचक बनने की इच्छा है, शादी नहीं करनी कहती है। फिर कुंभ में जाकर अखाड़े में उसने फिर कपड़े पहन लिए और अब बनारस चली गई है, घर नहीं आ रही — अब हम क्या करें?
क्या करोगी? जो करना था कर दिया; अब उसका जीवन है, वह आएगी। साधु पहले डिसाइड थोड़ी होता है — बढ़ना होता है; बढ़ते-बढ़ते अपने आप बन जाता है। कपड़े पहनने से क्या है?
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