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प्रश्नोत्तर P22-0046 · भाग 22

गुरु जी, कभी-कभी मन में बहुत लड़ाई — इंटरनल वॉर — होती है; जाना इस तरफ है पर उस तरफ खींचता है, इतना कन्फ्यूजन होता है कि समझ नहीं आता क्या करूं, तो मैं बहुत चिल्लाती हूं; कभी-कभी गुरु से भी गुस्सा आता है। फिर थोड़ी देर बाद अपने को ऑब्जर्व करती हूं तो समाधान मिल जाता है — यह क्या है?

चिल्ला लिया, लेकिन अगल-बगल को देख के — उनको क्या फर्क पड़ेगा, कम से कम उनके बारे में सोचना। ऐसी जगह चिल्लाओ जहां चिल्लाने से उनको फर्क ना पड़े; आपको फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन उनको पड़ेगा, और हमारी वजह से किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। बगल में भी कोई होगा — तो दूर चली जाओ, वे सोचेंगे क्या हुआ। बाकी पक्का कर लो — पीछे मत मुड़ो; जब तक पीछे मुड़ोगे तब तक अपने आप में नहीं हो पाओगे। जल्दी से जल्दी आगे बढ़ो।

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