प्रश्नोत्तर P22-0051 · भाग 22
गुरु जी, धारणा, ध्यान, समाधि क्या है?
धारणा का मतलब होता है — जब आपको कुछ चाहिए तो धारणा बन गई। अब देखना है कि आपको चाहिए क्या — "मुझे स्व में स्थिर होना है" या "उस परमात्मा से मिलना है", कुछ भी ले लो, एक पॉइंट तो पकड़ना पड़ेगा। अगर मुझे स्व में स्थिर होना है तो मुझे निर्विकार होने की धारणा बनानी पड़ेगी। जब धारणा पक्की करोगे तो काम होने लगेगा; और जब काम होने लगेगा तो उस पर ध्यान भी रहेगा — हर काम को ध्यान से करोगे कि कहीं विकार ना आए, निर्विकार कैसे हो जाऊं; यह अपने आप होने लगेगा — तो धारणा से ध्यान घटित हो गया। समाधि का मतलब — एक समय ऐसा आता है कि कुछ पता नहीं रहता, कुछ समझ में नहीं आता; क्योंकि समझ-समझ के जीव थक जाता है, कर-कर के थक जाता है, करने के लिए कुछ बचता नहीं, जितनी उसकी सामर्थ्य थी लगा दी, अब उसके पास कोई ताकत नहीं — वह समाधि की स्थिति होती है। समाधि के बाद तुम स्व में स्थिर हो गए, उसके बाद यात्रा होती है उस परम सत्ता में। धारणा पक्की करनी पड़ेगी। जैसे आप घर जा रहे हो, कोई कहे "चलो यहां होके चलते हैं" तो आप चले जाओगे; लेकिन रास्ते में फोन आ जाए कि आपका बेटा — जिससे आपका लगाव है — बहुत सीरियस है और आपका नाम ले के चिल्ला रहा है, जल्दी आओ, तो फिर कोई कहीं भी बोले, नहीं जाओगे, क्योंकि वह आपके लिए बहुत जरूरी है। और अगर पता चले कि बस बुखार है, तो कहोगे "दवा ले लो, हम होके आ रहे हैं।" जिस दिन जरूरी हो जाएगा कि मुझे निकलना है, स्व में स्थिर होना है, उस परम सत्ता से मिलना है — उस दिन आप उसके लिए कुछ भी कर सकते हो; अभी तो सिर्फ प्लानिंग कर रहे हो। जैसे बाप अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने आप को भी बेच देगा, लेकिन भाई या बहन के बच्चे बीमार हों तो उसका एक दायरा होगा — "मेरे पास इतना है, इससे ज्यादा नहीं कर सकता"; यानी यह हमारा ही चुनाव है। तुम पक्का कर लो तुम्हें क्या चाहिए — जितना पक्का करोगे उतनी तेजी से काम होगा। हमारी गलती यह है कि धारणा बनाने से पहले ही ध्यान और समाधि में चले जाना चाहते हैं — डायरेक्ट पाना चाहते हो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: माया को सस्ती क्यों कर देती है ब्रह्म की मस्ती ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-21