प्रश्नोत्तर P22-0133 · भाग 22
गुरु जी, जब साधक अपने आप में जाता है तो एक साथ तो घटना घटती नहीं होगी — थोड़ा अंदर गया, फिर बाहर आ गया, झलक आती है। तो जब वह थोड़े क्षण के लिए भी अंदर जाता है तो उस वक्त क्या फीलिंग होती है? और वह क्षण भर ही क्यों रहता है — क्या उस टाइम को बढ़ाया जा सकता है?
बस वही आप देख लीजिए, आप खुद महसूस करिए उस क्षण को, उस पल को। वह क्षण भर इसलिए रहता है क्योंकि आपको बाहर भी जाना है। अगर आपको पलटना नहीं होता तो आप टिक जाते, स्थिर हो जाते। आप आगे भी बढ़ते हो पीछे जाने के लिए — जहां जाते हो वहां का थोड़ी देर आनंद होता है, लेकिन फिर वापस जाना है ना। बाहर तो बाहर ही है; तुम ही तो वापस जा रहे हो, थोड़ी देर ही रह पाते हो, फिर कहते हो "चलो बाहर देख लेते हैं।" बढ़ाया जा सकता है — बाहर आओ ही मत। वो तो आपके ऊपर है; आप बाहर आ ही क्यों रहे हो? बाहर कुछ नहीं है फिर भी इतना भटक रहे हो, कुछ होता तो क्या करते!
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19