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प्रश्नोत्तर P22-0136 · भाग 22

गुरु जी, सभी धर्मों में अपने-अपने मंदिर-मस्जिद हैं, सब बोलते हैं दर्शन करने जाना — असल में दर्शन का क्या मतलब है? इसका कोई आध्यात्मिक महत्व है?

दर्शन इसलिए करना है कि दर्शन से मुक्त होना है। मंदिर में एक प्रतिमा बनाई गई और उस प्रतिमा को सामर्थ्यवान बनाया गया। मंदिर शांति का केंद्र है — गांव में कोई ऐसी जगह हो जहां सब बैठ सकें, क्योंकि सबके घर पे सब जाकर नहीं बैठ सकते। आज भले उसे व्यापार का अड्डा बना दिया, वह आपकी गलती है। उस प्रतिमा के यहां कोई माथा टेके, चाहे कुछ भी करे, कोई मान करे या अपमान करे — वह अपना काम कर रही है, स्थिर है। वैसे ही मंदिर से हमें यह सीखना चाहिए कि समाज में आकर मुझे अपना काम करना है — ना मुझे अच्छे के साथ जाना है, ना बुरे के साथ, बस अपना काम करना है। ऐसे ही पीपल, तुलसी, नीम को देव वृक्ष माना गया — पूर्वजों को पता था कि आने वाले समय में हमारे बच्चे पेड़ काटेंगे, जबकि इन्हीं से ऑक्सीजन लेते हैं, स्वस्थ रहते हैं; तो इनको देव वृक्ष कह देंगे तो कम से कम काटेंगे तो नहीं। वह डर आपके लिए लाभदायक है। ये 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं; जितनी ऑक्सीजन एक बड़ा वृक्ष देता है उतनी छोटा-सा तुलसी का पौधा देता है, इसलिए हमारे पूर्वज लगाते थे कि आपका स्वास्थ्य सही रहे। उन्हें पता था कि हम भोग-भोजन में फंसे रहेंगे, अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल नहीं रहेगा, इसलिए उसे देवी बता दिया।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19