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प्रश्नोत्तर P22-0137 · भाग 22

गुरु जी, मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है — तो क्या उसमें ताकत आ जाती है? हम प्रार्थना करते हैं तो क्या वे सुनते हैं? या अपनी श्रद्धा में ताकत रहती है?

आती है, तभी ना करते हैं; सुनते हैं, तभी आज तक प्रार्थनाएं चल रही हैं। अगर उसमें ताकत नहीं होती, केवल आपकी श्रद्धा में होती, तो आप पहाड़ पे खड़े होकर कहीं भी कर लेते, मंदिर क्यों जा रहे हो? मंदिर की मूर्ति निमित्त बनती है आपकी ऊर्जा को जागृत करने का — बस बात खत्म। जैसे अभी कहा जाए कि खट्टा लार बनाओ, तो नहीं बना पाओगे; लेकिन आम या अचार दिखा दूं, बोलूं भी ना, तो तुरंत खट्टी लार बनने लगेगी। विचार अंदर नहीं है, विचार बाहर से आता है, पांच इंद्रियों द्वारा हम ग्रहण करते हैं। अंदर कुछ नहीं है — अंदर तुम हो, शरीर एक मशीन है; बस आपको जानकारी है, और जैसी जानकारी है वैसा आप काम करते हो, वैसी आपकी ऊर्जा जागृत होती है। तो प्रतिमा ऊर्जा को जागृत करने का एक तरीका है। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा तेरा भगवान कहां है, तो प्रह्लाद ने कहा सर्वव्याप्त है; फिर पूछा क्या इस खंभे में है — बोले हां। अगर खंभे में भगवान होता तो दुनिया के जितने खंभे तोड़े जाते सब में भगवान निकलता। प्रह्लाद के भाव में था — इसलिए कहा गया "भावे विद्यते देवा", भाव में ईश्वर का वास। उन्हें खंभे से साकार रूप लेकर निकलना पड़ा, और उस रूप का पता प्रह्लाद को भी नहीं था — वे भयभीत होकर कांप रहे थे, और उनका इष्ट ही उन्हें गोद में लेकर सहला रहा था।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19