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प्रश्नोत्तर P22-0157 · भाग 22

गुरु जी, आप कहते हैं "कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा" और "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" — क्या इन दोनों में विरोधाभास है?

मैंने जीवन में दो श्लोक सुने हैं, बस — तीसरे की आज तक जरूरत नहीं पड़ी। ये कहां लिखा है, ऐसा ही लिखा है या नहीं, ये भी कभी देखने नहीं गया; लेकिन इन दो से मेरा काम हो गया। दोनों अलग-अलग स्थिति में हैं। एक "चाहिए" में है — जब मुझे कुछ चाहिए, तब "कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा"। उस स्थिति में अगर "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" अपना लोगे तो भ्रष्ट हो जाओगे, बर्बाद हो जाओगे। और जब कुछ नहीं चाहिए, तब "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" — ये स्थिति की बात है, बात खत्म।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19