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प्रश्नोत्तर P22-0193 · भाग 22

गुरुदेव, जब हम महापुरुषों के दर्शन को आतुर होते हैं, या किसी देवस्थान में कहीं भी जाते हैं, तो उन दर्शन से मुझे क्या सीखना चाहिए? हम किस लिए दर्शन करते हैं, क्यों जाते हैं, और वहां से मुझे क्या प्रेरणा लेनी चाहिए?

पहले तो दर्शन इसलिए करना है कि दर्शन से मुक्त होना है। दर्शन हम किसका कर रहे हैं? जो पहले नहीं था और बाद में नहीं रहेगा, उसी का दर्शन हो रहा है। जब तक दर्शन करने की इच्छा है, तब तक हम किसी न किसी दृश्य में फंसे हुए हैं। तो दर्शन भी हमें इसलिए करना है कि दर्शन से मुक्त होना है। अब दर्शन किसका करना है? जो मुक्त हुआ हो। और उसके लिए क्या करना होगा? उसका चरित्र अपनाना पड़ेगा। मुक्त व्यक्ति कह दो, महापुरुष कह दो, अपनी भाषा में कुछ भी कह दो — वह कहेगा: जिस तरीके से हमने किया था वह नहीं करना, यह गलती ना करना; आपको जिस तरीके से बताया जा रहा है वह करना। तो पक्का कर लो कि निकलना है, और कैसे निकलना है उसके लिए काम करो — मान की इच्छा का त्याग, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग, दिखावे का त्याग, बड़ा-छोटा बनने का त्याग। ये चारों त्याग तो करने पड़ेंगे, यह नहीं करेंगे तो निकल ही नहीं पाएंगे। फ्लाइट में जाना पक्का कर लिया, लेकिन टिकट भी तो चाहिए — यह टिकट है। दर्शन उसका करना है जो मुक्त हो गया हो, क्योंकि जैसा आप पांच इंद्रियों द्वारा देखते हो, महसूस करते हो, सुनते हो, स्पर्श करते हो, स्वाद लेते हो, वैसा आपका भाव बनता है, वैसी आपको ऊर्जा मिलती है। मुक्त से मिलोगे तो मुक्त का भाव बनेगा, वहां से ऊर्जा मिलेगी। और उसके चरित्र को अपनाना जरूरी है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13