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प्रश्नोत्तर P23-0003 · भाग 23

गुरु जी, वैसे तो जो बातें मैं उठा रहा हूं, वे संशय की श्रेणी में ही आती हैं।

ठीक है। हमारा काम है संशय मिटाना। अगर मैं आपका संशय नहीं मिटा पाऊं, और मिटाने के लिए आप तैयार हो, तो मुझे यहां नहीं बैठना चाहिए। आपका काम है संशय में प्रश्न करना, क्योंकि संशय आपके पास है; आपकी गलती भी नहीं, क्योंकि आप वहां हो। मेरा काम है आपके संशय को हटाना, बस आप तैयार रहो; आप तैयार नहीं रहोगे तो मैं भी कुछ नहीं कर सकता। तो कहने का मतलब यह है कि मूर्ति पूजा से लेकर विधियां तब सहायक बनेंगी जब आप ईमानदारी सत्कर्म अपनाओ। या तो पूरी तरह बैठ जाओ, तभी उठो जब उपलब्धि हो — ऐसे भी हो जाएगा। लेकिन आप कहिए कि नहीं, मैं कर्म करूंगा, और बेईमानी-दुष्कर्म के साथ विधियां अपनाओगे, तो आपका पतन के अलावा कुछ नहीं होगा, क्योंकि आपको ऊर्जा मिलेगी तो बेईमानी-दुष्कर्म और बढ़ जाएगा। राक्षसों ने भी देवी-देवताओं के दर्शन किए ना — उनका पतन हुआ, क्योंकि उनके अंदर बेईमानी थी, समाज को सताने के लिए ताकत चाहिए थी। तो यही हाल साधकों का हो रहा है — एक तरफ बेईमानी-दुष्कर्म कर रहे हैं, एक तरफ विधियां अपना रहे हैं, और पहले से ज्यादा भटक रहे हैं। आप अपना जीवन जांच लो — जब आप इस मार्ग में नहीं आए थे तब का देख लो, और जब से विधियां अपनाए हो तब से देख लो। मेन गलती यह हो गई कि विधियां देने वाले ने आपकी योग्यता नहीं जांची, और वह खुद योग्य नहीं था; आपको बोल नहीं पाया कि बेईमानी-दुष्कर्म छोड़ोगे तब मैं आपको दूंगा। आज लोग पंजीरी की तरह मंत्र बांट रहे हैं। पहले गुरु तब गुरु मंत्र देता था जब पूरी तरह जांच लेता था कि तुम्हें कुछ नहीं चाहिए।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13