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प्रश्नोत्तर P23-0005 · भाग 23

गुरु जी, जब बात शुरू हो रही थी तो मुझे लगा था कि आप साधना आदि का पूरी तरह निषेध कर रहे हैं, लेकिन अब लग रहा है कि निषेध सिर्फ इसलिए था कि अपरिपक्व व्यक्ति वैसा ना करे। दूसरा, आपने ध्यान का उदाहरण लेकर कहा था कि ध्यान करने वाला और जिसका ध्यान किया जा रहा है, वह बाहरी चीज हो गई; लेकिन वाल्मीकि जी 'मरा मरा' के रूप में ध्यान तो कर ही रहे थे — तो सहायता के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है?

समझना — वाल्मीकि जी ने 'मरा मरा' को मुक्ति और मोक्ष के लिए पकड़ा; भाव था मुक्ति और मोक्ष का। तो किसी मंत्र को आप किस भाव से पकड़ते हो, वो मायने रखता है। अगर यह बात आपको पक्का है कि यह पत्थर मारने से आप निकल जाओगे, तो निकल जाओगे। पक्का आपको होना चाहिए। पहुंचना कहीं नहीं है, बस छूटना है; आपके अंदर तो है ही। आपने इसे पकड़ा किसके लिए? मुक्ति के लिए, मोक्ष के लिए। तो पीटते-पीटते आप इसमें हो जाओगे, और इससे तो कुछ नहीं चाहिए था, तो यह यहां छूटेगा और आप अपने आप में आ जाओगे — यही मुक्ति है। सारा खेल भाव का है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13