आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P23-0007 · भाग 23

महाराज जी, प्रह्लाद के लिए खंभे में भगवान आए — ये तो अलंकारिक भाषा है, ऐसा होता तो नहीं?

ठीक है, मैं कह रहा हूं समझने के लिए, आप समझिए; आप उसे मत पकड़िए। हमारे सामने कहानी है, उससे हम क्या सीख के निकल जाते हैं — कहानी सही है या गलत है, उसमें नहीं जाना; हमें छूटना है। बचपन में मां कहती थी 'चंदा मामा, दूध पी ले', और हम पी लेते थे। क्या चंदा मेरा मामा है? दूध पिलाने का एक तरीका है। मां ना झूठ बोल रही थी ना सच बोल रही थी, दूध पिला रही थी तुम्हारे हित के लिए। तो यह सब आपका भ्रम कैसे टूटे, इसके लिए बोला जा रहा है। आप पूछोगे क्या सही है, क्या गलत — मैं कहूंगा दोनों नहीं हैं, क्योंकि दोनों हैं तो तुम नहीं हो। ना गलत है ना सही; उपयोग कर लो, निकल जाओ, सीधी सी बात। मैंने कभी कहा मुझ पर विश्वास कर? मैं तो आप लोगों से कहता हूं — इतना विश्वास करना कि मुझ पर कभी विश्वास ना करना। क्योंकि ज्ञान को समझना है और निकल जाना है; यह शरीर पहले नहीं था, बाद में नहीं रहेगा। ज्ञान लो, आगे बढ़ो — ये कभी धोखा नहीं देगा। और ज्ञान किसी का होता नहीं, जिसने समझा उसका हुआ। वही झूठ कभी सच होता है, वही सच कभी झूठ होता है — सब परिवर्तनशील है। सदुपयोग करो तभी निकल पाओगे; दुरुपयोग करना बंधन, सदुपयोग करना मुक्ति। बस इतनी सी बात है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13