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प्रश्नोत्तर P23-0018 · भाग 23

गुरु जी, माया किसे कहते हैं?

माया — एक तो प्रभु की माया है, उसमें आनंद से जीवन है; और एक आपकी माया है। यहां सबकी अपनी-अपनी माया है, और सब अपनी-अपनी माया में ग्रस्त हैं। तो जहां तक मैंने समझा, आपकी माया का निर्माण बेईमानी से हुआ है — बेईमानी माया है। इसे आप छोड़ दीजिए; बेईमानी-दुष्कर्म बस छोड़ दीजिए जीवन में। और सबसे ज्यादा अगर आपसे बेईमानी होती है तो पता है किससे? बोलचाल में — बाजार में हो, रास्ते में हो, बिना मतलब का बोलते हो, 'आ गया हूं, सामने ही हूं'। क्या जरूरत है? आदत है, लेकिन इस आदत की वजह से आप कितना गिर रहे हो, आपको पता है? संस्कार बने जा रहे हैं। कोई आया, बोला मुझे उधार पैसे दे दो — आपने कहा 'मेरे पास नहीं है'। सीधा कह दो ना: 'मेरे पास है, लेकिन तुम्हारी योग्यता नहीं है, इसलिए नहीं दूंगा।' अगर आप यह बात बोल दो, तो उसके अंदर एक ऊर्जा जगेगी, उसको आपके शब्दों की चोट लगेगी, और जाकर खूब मेहनत करेगा कि इससे बड़ा बन के दिखाऊंगा। चोट जरूरी है, लेकिन सच बोलोगे तब ना; तुम तो झूठ बोलते हो, चोट लगने ही नहीं देते। और तुमने उसके साथ धोखा किया — कहा मेरे पास नहीं है, लेकिन था, दे सकते थे।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13