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प्रश्नोत्तर P23-0024 · भाग 23

गुरु जी, नारायण को हम परमात्मा कह सकते हैं, और राम और कृष्ण परमात्मा का अवतार नहीं हैं?

मैं यह कह रहा हूं — सब एक ही ब्रह्म से है, तो और सब क्या है? या ब्रह्म दो हैं क्या? उनका परमात्मा अलग है, मेरा परमात्मा अलग है — उनका वाला मजबूत है, मेरा वाला कमजोर है? भाई, सब एक ब्रह्म से हैं, तो सब एक जैसे हुए; किसी ने अपने अवतार को समझा, किसी ने नहीं समझा, बस इतना सा फर्क है। पृथ्वी पर आने वाले सब एक जैसे हैं; किसी ने अपने आप को समझा, किसी ने नहीं समझा, इतना फर्क हो सकता है। वो अवतार हैं तो हम क्या हैं? हमारा भी परिचय बताओ फिर। एक तरफ कहते हो एक के अलावा दूसरा है ही नहीं — 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति' — फिर कह रहे हो वो परमात्मा तुम नहीं हो; तो मैं क्या हूं, मेरा परमात्मा कौन है? यह सब उलझाने वाली बात है। आदि गुरु शंकराचार्य जी अद्वैत का प्रचार कर रहे थे — एक है, एक के अलावा दूसरा नहीं है। तो जब मां ने शरीर छोड़ा और गांव वालों ने अग्नि नहीं दी, उन्होंने गांव वालों को श्राप दिया। तो किसको श्राप दिया? एक के अलावा दूसरा था ही नहीं, तो श्राप किसको और किसके लिए दिया? यहां तो तुरंत तीन खड़े हो गए — एक आदि गुरु शंकराचार्य जी, एक मां, एक गांव वाले। हमें क्या जरूरत है पहेली सुलझाने की? हमें निकलना है; जिसकी पहेली, वो सुलझाए।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13