आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0016 · भाग 24

गुरु जी, मेरी सोच में तो यह है कि मंदिर जाने वालों को, गुरु-चेला बनाने वालों को ज्ञान नहीं है, तो वे क्या करें?

आखिर जब सब एक ही है, तो फिर अज्ञानी आपके लिए दूसरा कैसे हो गया? आप तो कह दिए सर्व मैं हूं, सब जगह मैं हूं, दूसरा है ही नहीं — तो मंदिर में जाने वाला आपसे अलग कैसे हो गया? एक ज्ञानी हो गया, एक अज्ञानी हो गया, मंदिर भी अलग हो गया — किताबी ज्ञान आदमी को भटकाता है। बहुत लोग किताबी ज्ञान से अपने आप को ब्रह्म मान के बैठ गए, यात्रा ही रोक दी, और बैठ के बोलते हैं देखो मंदिर जाने वाले क्या कर रहे हैं। अगर सर्वत्र मैं ही हूं तो कुछ बोलने की आवश्यकता ही नहीं, और फिर भी उठ रहा है कि यह गलत है यह सही — वही राग-द्वेष है। इसलिए लोगों ने कहा, जीवंत गुरु की शरण में रहोगे तो वह आपके सारे भ्रम को तोड़ेगा। समझने का प्रयास करो, और समझ के अपने आत्मिक स्तर को उठाओ, अपनी कामनाओं से अपने आप को मुक्त कराओ, इस पर काम करो।

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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01