आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0018 · भाग 24

गुरु जी, कभी-कभी बड़े अधिकारी दबाव डालते हैं, डराते-धमकाते हैं, पर मैं नहीं झुकता — उनका सामना करने की यह शक्ति कैसे और बढ़े?

कहीं न कहीं आपने जीवन में वो अपनाया है जो उनके पास नहीं है; कहीं न कहीं वो गलत हैं और आप सही हो, तब वो झुक रहे हैं। अगर दोनों सही होते तो झुकने की बात भी नहीं आती, कोई किसी के सामने नहीं झुकता, सब अपना-अपना काम करते। झुकना तब पड़ता है जब हमने कुछ गड़बड़ी की है, नहीं तो न झुकने की आवश्यकता है, न झुकाने की आवश्यकता है। आप जिसके लिए रखे गए हो वो काम ईमानदारी से कर रहे हो, इसलिए वो दब जाते हैं। और आप ऐसा काम कर रहे हो तो समाज भी आपका साथ दे रहा है — आपकी ईमानदारी के कारण साथ दे रहा है। तो बस वही ईमानदारी तपस्या है। ईमानदारी आग है और सत्कर्म घी का काम करता है — वो आपको और भी प्रज्वलित करता है, और भी आगे बढ़ाता है। तो बस सत्कर्म बढ़ा दो — जरूरतमंद की सेवा, धन से, तन से, ज्ञान से, जिस लायक मैं हूं उस लायक; वो भी अपनी औकात के हिसाब से। आपकी ताकत बढ़ जाएगी, आपका बल बढ़ जाएगा। जैसे आपने लोगों को दौड़-दौड़ के न्याय दिलाया, तो आपकी ताकत बढ़ गई, क्योंकि वहां सत्कर्म हुआ; और जैसे-जैसे आपने लोगों को न्याय दिलाना चालू किया, वैसे-वैसे लोग आपके साथ हुए — और लोगों का साथ होना मतलब आपका बल बढ़ना।

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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03