आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0019 · भाग 24

गुरु जी, जनता की सेवा के लिए तो मैं आधी रात को भी एक पांव पर खड़ा हूं — सेवा करते हुए किस बात का ध्यान रखूं?

अधिकार से ज्यादा जब भी काम करोगे फंस जाओगे, ये ध्यान रखना। कभी अधिकार से ज्यादा काम करने का प्रयास मत करना। काम को काम के तरीके से करना — जिस पद पर हो उस पद का काम करना; न तो मिलावट करना, न मिलावट करने देना; सिस्टम का काम करना, उसमें अलग से कुछ मत मिलाना। जितना आपका अधिकार है उतना ही; किसी दूसरे एरिया से छीन के अपने क्षेत्र की सेवा मत करना — ऐसा भी लोग करते हैं। क्या मतलब है ऐसी सेवा का? एक का भोजन छीन के आपने दूसरे को खिलाया, तो एक आदमी तो भूखा रह गया ना; वो तो ज्यादा घुटन में चला गया कि मेरा भोजन छीन लिया गया। अगर दोनों को भोजन कराना था तो आपको अपने भोजन का त्याग कर देना चाहिए था। उस जिले में जा रहा था, आपने अपने जिले में ला दिया — क्यों? वहां भी तो मानव थे, वहां भी तो जरूरत थी। आप अपराधी हो गए, आपने अपनी ताकत का दुरुपयोग किया और कभी न कभी आपको दंड मिलेगा, क्योंकि इतने व्यक्तियों की बद्दुआ लगी — आपने उनका अधिकार छीन लिया। कॉलेज हो, स्कूल हो, ऐसा कभी मत करना। जिस पद पर आप हो उस पद का काम करना, ज्यादा उड़ना भी मत। अगर लोग कहें कि हमारी ये भी सेवा करो, तो बोलो — हम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारी पावर बढ़वाओ, आओ मेरे साथ मिलकर काम करेंगे।

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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03