आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0025 · भाग 24

गुरु जी, आपने ब्रह्मचर्य निभाने का संकल्प किस घटना पर लिया? बताना उचित हो तो बताइए।

मैं बचपन से ब्रह्मचारी था। ब्रह्मचर्य है ईमानदारी। आप लोग शरीर के ब्रह्मचर्य में पड़ गए हो, ये ब्रह्मचर्य कभी नहीं हो सकता। आपको ब्रह्मचारी होना है तो क्या? ईमानदारी — बस इतनी सी बात है। जितने महापुरुष हुए, उनके बच्चे हुए — राम के भी हुए, कृष्ण के भी हुए; संबंध किया होगा तभी ना। आपको जरूरत है ईमानदारी की; आप ब्रह्मचर्य को कुछ और समझ लिए, यही तो गड़बड़ है। तो भैया, ईमानदारी अपना लो। और मैं आपको बता दूं, बचपन से लेकर बीस तक मैं ब्रह्मचर्य में रहा; अब मेरा ब्रह्मचर्य भी खत्म हो गया — क्योंकि ईमानदारी भी मुझसे छूट गई, कर्म ही छूट गया। जब तक कर्म है, जब तक आप कर्ता हो, तभी तक बेईमानी या ईमानदारी है। आप कर्ता के भाव से मुक्त हो गए, तो आपके जीवन में न बेईमानी रही न ईमानदारी रही।

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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03