प्रश्नोत्तर P24-0026 · भाग 24
गुरु जी, क्या अपने आप में बैठना ध्यान नहीं है?
नहीं, अपने आप में बैठना ध्यान नहीं — आत्मिक चिंतन, मैं बोल रहा हूं; ध्यान की कोई आवश्यकता नहीं। आप लोग पता नहीं ध्यान-ध्यान-ध्यान... अरे, ध्यान से भी मुक्त होना है, क्योंकि जब तक कुछ रहा, आप पूरी तरह नहीं हो पाओगे। ध्यान का नशा हो गया है, ध्यान से भी मुक्ति चाहिए। आप समझो, आपसे ध्यान है, ध्यान से आप नहीं; और आपकी उपलब्धि तभी हो पाएगी जब आप पूरी तरह मुक्त होगे — ध्यान से भी। क्योंकि आप सोचिए ना कि आप ध्यान कर रहे हो, इसका मतलब कहीं बाहर हो, और जब तक आप बाहर हो, उपलब्धि नहीं हो पाएगी। आप इस पॉइंट को क्यों नहीं पकड़ते हो?
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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03