प्रश्नोत्तर P24-0027 · भाग 24
गुरु जी, ध्यान और आत्म-चिंतन में क्या फर्क है?
आत्म-चिंतन और ध्यान में ये फर्क है कि जब आप अपने आप में होते हो तो आत्म-चिंतन होने लगता है — मतलब आप जहां-जहां फंसे हो वहां का चिंतन होने लगता है, और वहां ध्यान अपने आप चला जाता है। फिर ध्यान से वहां से अपने आप को निकालना है। एक प्राकृतिक ध्यान घटता है, और एक ध्यान आपको घटाना पड़ता है निकालने के लिए; फिर आपको ये दोनों छूट जाएंगे। एक संकल्प को गिराने के लिए एक संकल्प लेना पड़ेगा। जैसे एक व्यक्ति पैदा हुआ तब नशा नहीं करता था, अब नशा करने लगा; अब उसे छोड़ना है तो ये कहना पड़ेगा कि आज से मैं नशे का त्याग कर रहा हूं — तब वो समाज में कह पाएगा कि हमने छोड़ दिया। और अगर उसने छोड़ने का संकल्प नहीं लिया, तो साल भर बाद भी यही कहेगा कि मैं साल भर से नहीं पीता, लेकिन ये नहीं कह सकता कि मैंने नशा छोड़ दिया। तो एक संकल्प को हटाने के लिए दूसरा संकल्प लेना पड़ता है, ताकि वो संकल्प हट जाए, मिट जाए।
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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03