प्रश्नोत्तर P24-0028 · भाग 24
गुरु जी, कोई कहे कि आप बस मुझे स्नान करा दो तो मुझे ज्ञान हो जाएगा — क्या ऐसे आत्मज्ञान हो सकता है?
भाई, ऐसा तो होगा नहीं। अगर मैं आपको स्नान करा दूं तो बस यहां एक मानसिकता बन जाएगी — मुझे भी करा दो, मुझे भी करा दो। होगा कुछ नहीं, वही शुरू हो जाएगा। अगर पाइप के पानी से आत्मज्ञान होता... मैं एक कुत्ते के बच्चे को नहला रहा हूं तो मैं आपको भी नहला सकता हूं, लेकिन आत्मज्ञान के लिए नहीं, क्योंकि आत्मज्ञान तो आप ही कर सकते हो। मैं सिर्फ आपको मार्ग दिखा सकता हूं। और मैं आपकी भावनाओं के साथ कभी खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर ऐसा होता तो मैं एक हाथ से पाइप पकड़ के सो जाता — सब नहाओ; रस्सी से नल हाथ में बांध लेते और नल खोल देते, सोते-जागते सबमें हाथ पड़ा रहता। लेकिन ऐसा नहीं है। हम आपको उलझाना नहीं चाहते, मैं आपको सुलझाना चाहता हूं, क्योंकि आप बहुत उलझ गए हो — आशीर्वाद में, शक्तिपात में, दुनियादारी में, मत्था टेकने में, हाथ फेरवाने में। मैं इसमें आपको जरा सा भी नहीं उलझाना चाहता, एक परसेंट भी नहीं। आपका कल्याण इन शब्दों के द्वारा होगा। जब आप इन शब्दों में जिओगे, तब यहां से भी आपको आशीर्वाद मिलेगा। जैसे मान लीजिए किसी ने आपको चेक दिया और आपने अपने अकाउंट में डाला, तो वो फिर एक बार उसी के बैंक में आता है; ज्यादा अमाउंट है तो उस आदमी से कंफर्म किया जाता है। कहने का मतलब — जब आप उस शब्द को यूज़ करोगे तो आपको यहां से भी सहायता मिलेगी। जितने शब्द मैं आपको दे रहा हूं, इन शब्दों को अपनाओ। ये जीवंत शब्द हैं, ये आपको निकाल देंगे।
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वीडियो: अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-09-03