प्रश्नोत्तर P24-0054 · भाग 24
गुरु जी, जितने बुरे कर्म हमने पिछले जन्म में किए हैं, उन्हें सही करने के लिए ईमानदारी-सत्कर्म करें — तो क्या उन्हें भोगना भी पड़ेगा?
भोगना भी पड़ेगा। कुछ इधर-उधर, अप्राकृतिक आप नहीं कर सकते; कोई सेटिंग नहीं कर सकता। आप देखिए — कृष्ण हों, राम हों — ये अपने कर्म को खुद भोग के गए, इनके परिवार भी गए। मोहम्मद को देखिए, उनके पास खाने को रोटियां नहीं थीं, उस गरीबी में उन्होंने जिया। जीसस को भी अपने कर्म का परिणाम भोगना पड़ा, सूली पे लटके। इस धरती पे जितने भी आए, सबको अपने कर्म का परिणाम भोगना पड़ा। और ये लोग कहते हैं, 'आओ, हम तुम्हें इनके सहारे बचा लेंगे' — जब ये खुद नहीं बचे तो आपको कैसे बचाएंगे? ये सीधा नहीं कह देते कि ईमानदारी-सत्कर्म करो। दुनिया के जितने भी धर्म-संप्रदाय-मजहब में चले जाओ, मूल यही है — ईमानदारी-सत्कर्म। जिसे भी उस परम सत्ता से मिलना है, बस ईमानदारी-सत्कर्म अपना ले। लोग बताते हैं ये ध्यान करो, कुंडलिनी जगाओ, थर्ड आई खोलो, 20 मिनट ये करो — इसी ने समाज को भटका दिया। लोग समझते हैं आश्रम में दो-तीन महीना रहेंगे और मुक्त होकर चले आएंगे। इन सबने यही सिखाया है कि अपने कर्म के परिणाम को भोगो और ईमानदारी-सत्कर्म के साथ जीवन जीते हुए निकल जाओ — और वो आपके हाथ में है, किसी और के हाथ में नहीं।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06