प्रश्नोत्तर P24-0055 · भाग 24
गुरु जी, मुक्ति और मोक्ष में डिफरेंस क्या है?
मुक्ति मतलब — आप अपने बनाए हुए संसार से, जिसमें बेईमानी और दुष्कर्म साथ कर रहे थे, उससे मुक्ति पा लिए। ईमानदारी पकड़ के आप मुक्त हो गए, अब आगे का बंधन बंधना बंद। लेकिन ईमानदारी से जी तो रहे हो, पिछला खत्म कैसे होगा? पिछला खत्म होगा सत्कर्म के द्वारा। अगर सिर्फ ईमानदारी पकड़ ली तो मुक्ति तो पा गए लेकिन मोक्ष नहीं मिलेगा — चक्रव्यूह में घुस तो जाओगे, बाहर नहीं निकल पाओगे। इसलिए ईमानदारी के साथ सत्कर्म जरूरी है; सत्कर्म जोड़ने से आपकी गति डायनामिक हो जाएगी, स्पीड पकड़ लेंगे। पवित्रता सत्कर्म से आएगी। जब पिछला खत्म होगा तो मोक्ष होगा — मोक्ष मतलब उस परम सत्ता से मिलना, चाहे उसे परमात्मा कह दो, खुदा कह दो; उसके बाद वापस लौटना नहीं होता। उसके बाद क्या होता है, वो मैं नहीं बोलूंगा — मेरा भाव है कि आप लोग भी चल के देखो। आप बहुत आसानी से अपने आप को ईमानदारी-सत्कर्म के द्वारा पवित्र करा सकते हैं।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06