प्रश्नोत्तर P24-0089 · भाग 24
योगी जी, अगर साधना से आदमी के अंदर सामर्थ्य भी आ रहा है, बल भी आ गया, और उसकी दबी हुई इच्छाएं भी उजागर हो रही हैं — तो अगर वो साधना भी करता रहे और अपनी इच्छाओं की पूर्ति भी करता रहे, तो इससे क्या होगा?
उसका स्तर उठेगा। बस उस इच्छा को पूरी करने में बेईमानी ना करे, धोखा ना करे, किसी को तकलीफ ना दे। तो ये इधर बढ़ेगा, और इधर से भी वो धीरे-धीरे छूटेगा। इच्छाओं की पूर्ति होगी तभी तो छूटेगा, ऐसे नहीं छूटेगा। तो एक तरफ इच्छाओं की पूर्ति भी होगी — बस वो साधना ना छोड़े, जिसकी वजह से ये सामर्थ्य आ रहा है, बल आ रहा है। ऐसा ना हो कि इच्छा पूरी करने में इसको छोड़ ही दे, तब वो गिर जाएगा। क्योंकि धीरे-धीरे उसकी ताकत खत्म हो जाएगी, और जैसे ही ताकत खत्म हो जाएगी, सब छीन लिया जाएगा। देखो ना, जैसे व्यक्ति पद पे बैठता है, पावर पे बैठता है, तो सारा सिस्टम उसका काम करता है; लेकिन जैसे ही पद गया, बस सब छूट गया। आज जो मकान-फ्लैट दे रखा है, उसका भी नोटिस आ जाएगा कि खाली करो। तो जिसके माध्यम से आपको मिला, वो ना छूटे; वो छूटा तो सब गया। और गलती ज्यादा यही होती है कि हम इच्छा पूर्ति में ही मशगूल हो जाते हैं, उसी में मस्त हो जाते हैं — वो जड़, जहां पानी देना था, वही भूल जाते हैं कि मेन स्रोत कहां था।
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वीडियो: अब देखना है कि तुम किसे महत्व देते हो #योगी · 2026-10-22