प्रश्नोत्तर P24-0090 · भाग 24
योगी जी, मुझे कैसे पता चले — मैंने तो जाने-अनजाने पता नहीं क्या-क्या इच्छाएं बना रखी होंगी, बना-बना के भूल गई कि कितनी इच्छाएं बन गईं। और अगर अब माहौल चेंज हो गया, अब वो चीज नहीं चाहिए, तो फिर क्या करें?
छोड़ दे ना, समझ गए। अगर नहीं चाहिए तो छूट गया ना। जरूरी नहीं कि भोग के छूटे, समझ के भी छूट जाता है। जिन बच्चों को खिलौना नहीं मिलता, बड़े होने पे वो भी तो छोड़ देते हैं, और जिनको मिलता है उनसे भी छूट जाता है — जिसकी समझ विकसित हुई। बचपने में अगर मुझे नहीं मिला और किसी और को मिला, तो उस समय दुख होता है। लेकिन जैसे ही समझ विकसित होती है, मैं देखता हूं कि मां-बाप किन परिस्थितियों में थे, तो पछतावा होता है कि दुख की कोई बात ही नहीं थी, फिर भी उन्होंने मेरे लिए इतना किया — तो छूट जाता है। तो वैसे ही कुछ इच्छाएं पूरा करने के बाद छूटती हैं, कुछ इच्छाएं समझ के ही छूट जाती हैं। आदमी यहां ये भी कर सकता है कि मेरे तप से जो सामर्थ्य मेरे अंदर आ गया, मैं उसको संग्रह करूंगा, फालतू चीजों में खर्च नहीं करूंगा, देखूंगा ये सामर्थ्य मुझे लास्ट तक कहां पहुंचाएगा। अगर आप इसे इच्छाओं में नहीं लगाओगे, तो ये साधना आपको उस परम स्थिति पे पहुंचा देगी। क्योंकि जैसे-जैसे साधना करोगे, वैसे-वैसे सामर्थ्य बढ़ता जाएगा। अपनी ताकत को सत्कर्म में लगा दो, जरूरतमंद की सेवा में लगा दो, तो कई गुना वापस आ जाएगा।
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वीडियो: अब देखना है कि तुम किसे महत्व देते हो #योगी · 2026-10-22