आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0095 · भाग 24

गुरुदेव, यहां इतनी एनर्जी, इतनी पॉजिटिविटी, इतना पावर कैसे है? और हमारे घर वालों को क्यों नहीं लग रहा कि यहां कुछ है, जो मैं महसूस कर सकती हूं?

काम तो करना पड़ेगा ना — सिर्फ ऐसे आश्रम बना देने से कुछ थोड़ी ना होगा। और वो कहीं और लगे हैं ना; जहां व्यक्ति लगा है, वहीं का पावर उसे दिखेगा। श्रद्धा तब होगी जब आपको वह चाहिए; जब चाहिए ही नहीं, तो श्रद्धा क्या? आपकी आत्मा को अभी यह चाहिए, इसलिए आपको फील हो पा रहा है — डिमांड है। उनकी डिमांड अगर भोग-विलास है, पैसा, धन-दौलत, रुपया, प्रॉपर्टी है, तो वो ऊर्जा उसमें महसूस करते हैं। जैसे कोई एक घर में गया तो बहुत अच्छी फीलिंग हुई, झोपड़ी में गया तो बड़ा बुरा लगा; एक मोबाइल लिया तो बड़ा अच्छा लगा, उससे नीचे वाला लिया तो बुरा लगा। वो यात्रा करना भी नहीं चाहते ना, वो अपनी यात्रा में हैं। यहां हर जीव अपनी-अपनी यात्रा कर रहा है, हर जीव कहीं ना कहीं लगा हुआ है। हर वक्त, हर क्षण पूरी सृष्टि परिवर्तनशील है; यहां पर हर व्यक्ति की कहीं ना कहीं यात्रा हो रही है, कोई रुका नहीं है। अब वो कहां यात्रा कर रहा है, उसे पता है। तो बस निकलने के लिए तुझे काम करना पड़ेगा — बातों से बात नहीं बनने वाली, यह समझ ले। निकलने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी, अपार संघर्ष करना पड़ेगा।

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