आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0103 · भाग 24

योगी जी, 25 साल में तो मैंने गुड़गांव में अपना घर बना दिया था। हमारे नौजवान ऐसे होने चाहिए — शरीर से स्वस्थ लगते हैं, लेकिन अपना दिमाग नहीं खोलते, समझते भी नहीं। तो दुख होता है, क्या करें? क्या फिर इनको समझाना ही छोड़ दें?

ऐसा है, आपने घर इसलिए बना लिया कि जो आपके पास घर था, वो आपके जैसा घर नहीं था — या आपकी जरूरत थी, या आपकी इच्छा थी। आपकी जरूरतों ने आपके लिए घर बनवाया। उसे तो घर बना-बनाया मिल गया; जैसा वो चाहता है वैसा घर है, जैसा चाहता है वैसा बाप है, वैसी मां है — तो उसे घर बनाने की क्या जरूरत है? अगर कोई समझना नहीं चाहता — आप देख लो क्या वो समझना चाहता है, कि जहां है उसी में जीना चाहता है — अगर जहां है उसी में जीना चाहता है, तो उसे छोड़ दो, क्योंकि समझाने में आपकी ऊर्जा भी खत्म होगी और वो समझेगा भी नहीं। फिर जितना उसका लेवल है, उतने लेवल का उससे काम ले लो। अगर वो सेवा करना चाहता है तो उतने लेवल पे ही लो। और अगर उसकी आगे बढ़ने की प्रवृत्ति है, बढ़ने की इच्छा है, तो फिर उसको आगे बढ़ाने का आप भी प्रयास करो — लेकिन देखो, उसका प्रयास है क्या। अगर वो बार-बार ऐसे ही कर रहा है, तो इसका मतलब उसकी इच्छा नहीं है; उसने अपने माइंड को फ्लाइट मोड में डाल दिया — अब तुम कितना भी कॉल करते रहो, कॉल लगने वाली नहीं है।

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वीडियो: काम उसी पे करना चाहता हूँ #योगी · 2026-10-21