प्रश्नोत्तर P24-0104 · भाग 24
योगी जी, और अगर कोई सच में बदलना चाहता हो, सीखना चाहता हो, तो फिर उसके लिए क्या करें?
अगर कोई बदलना चाहता है, तो आप उसके लिए मेहनत करिए। लेकिन पहले उसे धिक्कारिए — पहले उसे बेमतलब का डांटिए, डपटिए। जब आप उसे बेमतलब का डांटोगे, तब पता चलेगा कि वो सच में सीखना चाहता है या टाइम पास करने आया है। ऐसे ही आया होगा तो भाग लेगा; और डांटने के बाद भी अगर रुक गया, तब वो सीखना चाहता है। उसका इंटरव्यू उसी में ले लो — उसके लिए बिना मतलब का इतनी विपरीत परिस्थितियां पैदा कर दो कि या तो वो भाग जाए, या उस परिस्थिति को पार कर जाए; तब फिर उस पर मेहनत करो। मैं सीधा कहता हूं — निकल भाग, काहे को आया, मैंने तुझे बुलाया क्या? बुला तो मैं ही रहा हूं, लेकिन मैं सीखने वाले को बुला रहा हूं, टाइम पास करने वाले को नहीं; तो टाइम पास करने वाले को मैं वहीं खत्म कर देता हूं। बेमतलब पे डांटोगे तभी पता चलेगा कि उसका ध्यान लक्ष्य पे है या मेरे डांटने पे। तुम्हें सीखना है तो सीखने के लिए मेरी डांट सुननी पड़ेगी। मैं गुस्सा इसलिए करता हूं कि मेरे गुस्से के साथ मैं सिखाऊंगा — तुम्हें मेरे गुस्से के साथ सीखना है तो सीखो, नहीं तो जाओ। और तभी तुम सीख पाओगे। भागना होगा तो अभी भाग लेगा — ना मेरा कुछ गया, ना उसका कुछ गया। टाइम पास वाला बाद में भागेगा, तो मेरी मेहनत चली जाएगी। इसीलिए ज्यादातर लोग मेरे पास टिक नहीं पाते, मुझे गुस्से वाला कहते हैं — क्योंकि मैं जरूरतमंद के लिए काम कर रहा हूं। सच में जिसकी जरूरत हो, जिज्ञासा हो, तड़प हो, बेचैनी हो, जीवन में कुछ करना चाह रहा हो, कहीं पहुंचना चाह रहा हो — मैं उसके लिए काम करना चाहता हूं। क्योंकि ये मुझे फ्री में नहीं मिला है। अगर आज मैं सिखाने के लायक बना हूं, तो इसके लिए मैंने मेहनत किया है; मैंने किसी की नकल नहीं की, किसी का फार्मूला नहीं चुराया, किसी की वाणी नहीं चुराई। कठोर तपस्या के बाद मैंने इसे पाया है, और मैं उस व्यक्ति को देना चाहता हूं जो इस लायक हो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: काम उसी पे करना चाहता हूँ #योगी · 2026-10-21