आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0129 · भाग 24

गुरु जी, मैं ईमानदारी, सत्कर्म, प्रार्थना कर रहा हूं, रोज खुद को देख रहा हूं। पर अभी भी मेरे अंदर डर है — आंख बंद करके किसी स्थिति को देखता हूं तो भय आता है, ध्यान में अंधेरा दिखे तो भी भयभीत हो जाता हूं। इस भय से कैसे निकलें?

डर आया, तो डर का कारण क्या है, उसके पीछे क्या है? कमजोरी — कहीं ना कहीं आप में कमजोरी है; उस कमजोरी को दूर करो। और जिससे डर लगता है, उसे देखते रहो, भय खत्म हो जाएगा। जिस चीज का हम सामना करते हैं, उसके पास रहने लगते हैं, वो छूट जाती है। जैसे विवाह के बाद पहले दिन लगता है छोड़ूं ही नहीं, छह महीने बाद वो लगाव नहीं रहता। कोई भी वस्तु — गाड़ी, बंगला — उसे पाने के लिए बेचैन थे, जब पा जाते हो और उसमें रहने लगते हो, तो ऊब जाते हो। तुम्हें लोगों ने बचपन से बता दिया कि इन सब में सुख है; नहीं, ये सब बस संसाधन हैं — तुम्हें तुम चाहिए, बस। जंगल में शेर से डर क्यों है, बिल्ली से क्यों नहीं? क्योंकि बिल्ली मार नहीं सकती। शेर का भय नहीं है, मृत्यु का भय है — जीने की इच्छा है, और वो ताकतवर है। तो या तो सुरक्षित हो जाओ — जहां शेर ना पहुंचे वहां साधना करो — या शेर से ताकतवर हो जाओ; शेर के सामने मत जाओ। भय तब रहता है जब आपके पीछे कोई इंतजार कर रहा हो, जब कुछ चाहिए हो। जेब कटने का डर उसी को है जिसकी जेब में पैसा है; पैसा ही नहीं तो भय किसका? जो कुछ है, उसका सामना करना पड़ेगा — सामना करोगे तो निकल लोगे, सामना नहीं करोगे तो बचे रहोगे, पार नहीं हो पाओगे।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08