आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0142 · भाग 24

गुरु जी, दशहरे के दिन किसी ने पूछा था कि मैं राम जैसा कब बनूं, तो आपने कहा — राम क्यों बनना है, तुम तुम क्यों नहीं होना चाहते? पर हम तो सोचते हैं कि उन पर चलकर हम और अच्छे बनें?

हां, तुम तुम हो जाओ ना। मैं कह रहा हूं, तुम तुम हो जाओ ना। तुम उस परमात्मा से हो, तो तुम तुम हो जाओ ना। तुम्हें अपने से इतनी घृणा हो गई कि तुम राम बनना चाहते हो, तुम कृष्ण बनना चाहते हो — तुम तुम क्यों नहीं होना चाहते? राम तो कभी तुम्हारे बनने की कोशिश किए? कृष्ण तो कभी तुम नहीं बने। वह तो वह बने, जो थे वो बने। बस इंसान ने अपने से इतनी घृणा कर ली कि वो किसी और को अपना बनाना चाहता है कि हम ऐसे बनें। तुम राम बनोगे तो भी भटकोगे, विवेकानंद बनोगे तो भी भटकोगे। मेरा यही कहना है कि तुम तुम हो जाओ, और तुम तुम हो जाओगे तभी आनंद घटित होगा।

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