आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0143 · भाग 24

गुरु जी, मेरी उम्र 25 साल है। मैं एक रुपया भी नहीं कमाता, मेरा पेट मेरी मां भरती है। मुझे भी आत्मचिंतन करना है — क्या करूं?

पहले रुपए कमा लो। पहले रुपए कमा लो, और उन रुपयों से पहले मां को कुछ सुख दे दो। जब तुम एक रुपया कमाते नहीं हो, तो आत्मचिंतन क्या करोगे? धन की ताकत, तन की ताकत — अगर तुम्हारे तन की ताकत है, और मां तुम्हें खिला सकती है, तो तुम मां को क्यों नहीं खिला रहे? वह देखो। जब तुम अपना पेट नहीं भर सकते, तो तुम आत्मचिंतन क्या करोगे? तुम तो एक बोझ हो धरती पर — अपनी मां के लिए, सबके लिए। मां क्या करे, बेचारी को खिलाना ही पड़ेगा। तुमसे क्या आत्मिक चिंतन होगा? तुम तो एक मजबूर, कमजोर, लाचार व्यक्ति हो। जो जीवन में अपना पेट नहीं भर सकता, जिसमें अपना पेट भरने की क्षमता नहीं हो, वह क्या आत्मिक चिंतन करेगा? वह तो कमजोर व्यक्ति है, आलसी व्यक्ति है। बैठे-बैठे सब मिल रहा है, बढ़िया से खा रहा है, और करना है आत्मिक चिंतन! पहले इस बोझ से हटो। खुद कमाकर अपनी मां को खिलाना शुरू करो, तब उसके बाद आत्मिक चिंतन होगा। जब जीवन में किसी के लिए कुछ किया ही नहीं, मां का अभी तक खा रहे हो, तो क्या आत्मिक चिंतन करोगे?

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