आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0149 · भाग 24

गुरु जी, ईमानदारी और सत्कर्म पर कुछ बताइए — जब आप ईमानदारी बोलते हो तो उसका क्या मतलब है?

ईमानदारी — जब आपके द्वारा कर्म हो रहा है, लेनदेन हो रहा है, चाहे शब्दों का, चाहे वस्तुओं का। देखने का भी लेनदेन होता है — कि आप किसी को घूर के देख रहे हो कि प्यार से देख रहे हो। तो लेनदेन में ईमानदारी हो; लेनदेन में छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड ना हो। और जब मुझे मौका मिले, तो जरूरतमंद की सेवा कर देनी चाहिए, जिस लायक मैं हूं। यही है ईमानदारी और सत्कर्म। इसी से निर्विकार होने में सहायता मिलती है। जरूरतमंद कौन? भूखे को भोजन, प्यासे को पानी। जिसका पेट भरा है, वहां देने की जरूरत नहीं है; वो तो पहले से भरा है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08