आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0150 · भाग 24

गुरु जी, सत्कर्म करने में भी तो अहंकार आ सकता है — कि मैंने किसी का अच्छा किया?

सत्कर्म में इच्छा-अपेक्षा ही नहीं होती, तो अहंकार कैसे होगा? किसी का अच्छा सोचा, प्लानिंग कर दी — वो सत्कर्म नहीं। सत्कर्म का मौका प्रकृति देती है, आपके बस में नहीं है। आप रास्ते में जा रहे हो, किसी ने मार्ग पूछा और आपने बता दिया — उसमें अहंकार आएगा? कोई गिर गया, आपने उसे उठा दिया — उसमें अहंकार आएगा? वहां सोचने का समय ही नहीं होता; वहां सीधा करने का समय होता है। पहली एंट्री किसकी है? उसकी। सोचने का मौका किसने दिया? उसने, कि मुझे मार्ग बताओ। अब तुम्हें बस इतना सोचना है कि तुम्हें मार्ग मालूम है या नहीं; आप वहां और कुछ नहीं सोच सकते। उसने कहा मुझे भोजन कराओ — अब दो ही बात हैं, या तो मैं कराऊंगा या नहीं। हमें लगता है हम सोचते हैं — अरे, आपसे करवाया जा रहा है, आपको लग रहा है मैं कर रहा हूं; यही तो भ्रम है। आपसे सोचवाया जा रहा है। जरूरत आपसे करवा रही है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08