प्रश्नोत्तर P24-0151 · भाग 24
गुरु जी, इसका मतलब तो यह हुआ कि प्रकृति हमसे सत्कर्म करवा रही है। तो हमारे अपने बस में क्या है?
अब सत्कर्म करना या ना करना आपके बस में है। उसने सत्कर्म का मौका दे दिया; आप कह सकते हो मैं रास्ता नहीं बताऊंगा। फिर वो कुछ नहीं बोलेगा, चला जाएगा किसी और से पूछने। आप पर ब्लेम भी नहीं करेगा, किसी से कहेगा भी नहीं कि उस आदमी ने मुझे रास्ता नहीं बताया।
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08