आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0152 · भाग 24

गुरु जी, अगर हम सोच के करें कि मुझे गरीबों की मदद करनी है, या कोई अनाथ आश्रम चलाना है — तो क्या वह सत्कर्म नहीं है?

ये तो प्लानिंग हुई। ये मदद हो गई, सेवा हो गई; सत्कर्म नहीं। मदद कमजोर की करते हो; सत्कर्म में मजबूत-कमजोर नहीं होता। जब आप किसी को मार्ग बताते हो तो उसका बैकग्राउंड पता रहता है आपको? अनाथ आश्रम चलाना सेवा में आएगा — लेकिन सेवा भी ठीक है। सत्कर्म का मौका प्रकृति देती है; सेवा प्लानिंग से कर सकते हो। सेवा में आप बड़ा-छोटा देख सकते हो; सत्कर्म करते हुए बड़ा-छोटा पता ही नहीं रहता, क्योंकि सामने वाला कौन है पता ही नहीं। हो सकता है जिसको आप मार्ग बता रहे हो, या जिसने कहा बेटा एक गिलास पानी पिला दो, वो आपसे भी करोड़पति हो। सत्कर्म चेतना कराती है, प्रकृति मौका देती है; वहां कर्ता भाव आएगा ही नहीं। किसी के घर में आग लगी, हम पानी डालते हैं — वहां सोचते नहीं कि अमीर का घर है या गरीब का, दोस्त का है या दुश्मन का; बस करते हैं। सत्कर्म में सोचने का मौका नहीं मिलता। जब सोचने का समय हो, मौका हो, तो समझ लेना आप सत्कर्म नहीं कर रहे हो, सेवा कर रहे हो। सत्कर्म में तो ऑन द स्पॉट फैसला लेना पड़ता है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08