आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0153 · भाग 24

गुरु जी, हम रोज बच्चों को बिस्किट देते हैं — यह सत्कर्म है या सेवा? और रास्ते में किसी का एक्सीडेंट हो जाए और हम उसे अस्पताल पहुंचा दें, तो?

ये सत्कर्म है, क्योंकि उन बच्चों का मुझे नाम तक नहीं पता; मुझे पता ही नहीं कब आएंगे, नहीं आएंगे। मेरी कोई प्लानिंग नहीं है कि इन्हें रोज बिस्किट देना ही है — आए तो दे देंगे, नहीं तो कोई बात नहीं। हम उन्हें खोजते नहीं, कभी किसी का इंतजार नहीं करते, बुला-बुला के नहीं देते; नेचुरली होता है। हमारा काम यही है कि इस रास्ते से कोई भी गुजरे, उसे बिस्किट दो, मटके में पानी है तो पी लो। वो कौन है, कौन नहीं, मुझसे मतलब नहीं। और किसी का एक्सीडेंट हुआ, आपने उसको अस्पताल तक पहुंचाया — यह सत्कर्म है, क्योंकि आपकी प्लानिंग नहीं थी कि कोई एक्सीडेंट होगा और मैं पहुंचाऊंगा। कर्म का मौका प्रकृति देती है; आप कर भी सकते हो, नहीं भी कर सकते — वो आपके ऊपर है। आपको कोई आके शिकायत नहीं करेगा कि आपने क्यों नहीं किया। लेकिन ईमानदारी तो पूरी तरह आपके हाथ में है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08