प्रश्नोत्तर P24-0154 · भाग 24
गुरु जी, इंदौर जाते समय मैंने दो लोगों को लिफ्ट दी — एक को मैंने खुद पूछा कि कहीं छोड़ दूं, और दूसरे लड़के ने खुद आकर कहा कि भैया एक घंटे से खड़ा हूं, मुझे छोड़ दोगे? इनमें सत्कर्म कौन सा है?
इस सिचुएशन में जो खुद आके बोला कि छोड़ दोगे, वो सत्कर्म है। दोनों की फीलिंग देख लो — जब तुमने खुद किया उस समय की फीलिंग, और जब वो आके बोला तब की फीलिंग; उसका एहसास करो। एक सत्कर्म है, एक सेवा है। जो तुमने खुद बुला के किया, ये भी ठीक है; कहीं ना कहीं ये भी ठीक है। भोजन नहीं मिला तो नाश्ता कर लो — कम से कम जिंदा तो रहोगे; जिंदा रहोगे तब ना भोजन करोगे। तो सत्कर्म मिल रहा है तो ठीक है, सेवा तो करते रहो। जब भी हम भोजन करते हैं, आसपास कुछ जीव-जंतुओं को तो भोजन करा ही सकते हैं। दुनिया में कहीं भी चले जाओ, रोटी डाल दो, वहीं आकर खा लेंगे। हर वक्त, हर दिन आप सेवा-सत्कर्म कर सकते हो, करते रहो। आखिर कुछ ना कुछ तो करोगे; सेवा-सत्कर्म नहीं करोगे तो दुष्कर्म करोगे। करना आपका स्वभाव है — जब तक निकलोगे नहीं, तब तक करते रहोगे।
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08