प्रश्नोत्तर P24-0157 · भाग 24
गुरु जी, हम कुत्तों के लिए बिस्किट या टोस्ट एक जगह डाल आते हैं, और एक-दो दिन बाद जाते हैं तो वैसा का वैसा पड़ा मिलता है। मन में आता है कि किसी ने खाया ही नहीं। क्या इसका मतलब प्रकृति हमें सत्कर्म का मौका नहीं दे रही?
ऐसा नहीं है; चार दिन के बाद देखो। आप रख के चले गए, जरूरतमंद के लिए कर रहे हो, और वो वर्तमान में मौजूद है — तो आपको लग रहा है ये सत्कर्म हुआ; देखना कहीं आप फेंक के तो नहीं आ रहे हो। और जो रोज घर की रोटी, फल-सब्जी के छिलके गाय को जाके खिलाते हो — ये ठीक है, सेवा तो है। किसी की भूख तो मिट रही है; अच्छा है, करना चाहिए। सत्कर्म का मौका तो प्रकृति देगी, आप सेवा तो करते रहो। अगर सेवा करोगे तो आगे सत्कर्म का मौका प्रकृति देगी। सेवा से भी पीछे मत हटो। ऐसा नहीं कि मौका मिलेगा तब करेंगे — अभी से करते रहो।
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