आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0158 · भाग 24

गुरु जी, एक सांप चूहे को खाने आ रहा है और हम देख रहे हैं — तो हमें चूहे को बचाना चाहिए या सांप को खाने देना चाहिए?

वहां बस देखते रहो। और चूहे को बचाना है तो फिर अपना मांस काट के सांप को दो, उसे भोजन दो। अरे भाई, वो उसका भोजन है। सांप कब दूध पीता है? आज तक किसी ने देखा नहीं। एक चिड़िया दिन भर में कितने छोटे-छोटे कीड़े खाती है, पता है? चूहे को बचा लोगे तो क्या वो शाकाहारी हो जाएगा? वो भी तो खाता है। जीव जीव का आहार है; मानव को छोड़ के — मानव के लिए शाकाहारी शुद्ध भोजन है, बाकी जीव जीव का आहार है। आपको किसी का भोजन छीनने का अधिकार नहीं है; छीनोगे तो दंड लगेगा, बाद में भोगना पड़ेगा, आपका भी भोजन छीना जाएगा। क्या पता वो तीन-चार दिन से भूखा हो, अंतिम अवस्था में हो, और आपकी वजह से भोजन ना मिलने से मर जाए — तो उसका जिम्मेदार कौन? हम, जिसने उसके भोजन में बाधा डाली। इसलिए मकड़ी के जाले में अगर कोई तड़प रहा है और मकड़ी है, तो मैं नहीं छुड़ाता; और मकड़ी नहीं है, खाली जाला है, तो छुड़ा देते हैं — कि मर भी जाए तो खाएगा कौन? बहुत समझ के जीना पड़ता है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08